पीएम राहत योजना: सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मिलेगा 1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज, जिले में प्रशिक्षण संपन्न I
नर्मदापुरम। सड़क हादसों में घायल होने वाले व्यक्तियों को त्वरित और नि:शुल्क उपचार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम राहत’ (PM RAHAT) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सोमवार, 9 मार्च को जिला प्रशिक्षण केंद्र में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई। इस प्रशिक्षण में स्वास्थ्य, पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारियों सहित निजी अस्पतालों के चिकित्सकों को योजना की बारीकियों से अवगत कराया गया।
7 दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि मार्च 2026 में स्वीकृत इस योजना का मुख्य उद्देश्य ‘गोल्डन ऑवर’ (दुर्घटना के बाद पहले घंटे) में पीड़ित को बिना किसी आर्थिक बाधा के इलाज मुहैया कराना है।
योजना की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
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कैशलेस सुविधा: पीड़ित को दुर्घटना के 7 दिनों तक अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार मिलेगा।
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कोई पात्रता शर्त नहीं: इस योजना का लाभ लेने के लिए बीमा या आय की कोई सीमा तय नहीं की गई है।
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सभी सड़कें शामिल: किसी भी प्रकार की सड़क (राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग या स्थानीय सड़क) पर हुए हादसे इस योजना के दायरे में आएंगे।
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डिजिटल प्रक्रिया: भुगतान मोटर वाहन दुर्घटना कोष (MVAF) के माध्यम से सीधे अस्पतालों को किया जाएगा।
‘गुड सेमेरिटन’ (नेक मददगार) की भूमिका
सीएमएचओ डॉ. नरसिंह गेहलोत ने जानकारी दी कि कोई भी राहगीर दुर्घटना की स्थिति में 112 नंबर पर कॉल कर एम्बुलेंस और नजदीकी अस्पताल की सहायता ले सकता है। डीएसपी ट्रैफिक संतोष मिश्रा और जिला परिवहन अधिकारी प्रमोद कापसे ने जोर देकर कहा कि यदि पीड़ित को पहले एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो 50 प्रतिशत मौतों को रोका जा सकता है।
पारदर्शी और त्वरित मॉनिटरिंग
योजना का संचालन eDAR (इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट) पोर्टल के माध्यम से होगा। गंभीर मामलों में पुलिस को 48 घंटे और सामान्य मामलों में 24 घंटे के भीतर डिजिटल पुष्टि करनी होगी, ताकि उपचार और भुगतान की प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
प्रशिक्षण कार्यक्रम में सीएमएचओ डॉ. नरसिंह गेहलोत, डीएसपी ट्रैफिक संतोष मिश्रा, आरटीओ प्रमोद कापसे, आरएमओ डॉ. गजेंद्र यादव, जिला मीडिया प्रभारी सुनील साहू और आशीष भार्गव सहित बड़ी संख्या में चिकित्सा अधिकारी व डेटा एंट्री ऑपरेटर उपस्थित रहे। तकनीकी सत्र में एनआईसी मध्यप्रदेश के विशेषज्ञों ने वर्चुअल माध्यम से संचालन संबंधी जानकारी साझा की।

पत्रका- कुणाल पासवान
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