ब्रह्म सत्य है, जगत मिथ्या: आदिगुरु शंकराचार्य जयंती पर माखननगर में भव्य व्याख्यानमाला संपन्न
माखननगर (नर्मदापुरम)। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा आदिगुरु शंकराचार्य जयंती पखवाड़े के उपलक्ष्य में रविवार को माखनलाल चतुर्वेदी महाविद्यालय में एक गरिमामय व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विद्वानों और संतजनों ने अद्वैत दर्शन और भारतीय संस्कृति के मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को आध्यात्मिक विरासत से जुड़ने की प्रेरणा दी।
सनातन धर्म के पुनर्जागरण के नायक थे शंकराचार्य: उत्तम गायकवाड़
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, गायत्री परिवार के संभाग प्रभारी श्री उत्तम गायकवाड़ ने आदिगुरु शंकराचार्य को नमन करते हुए कहा कि वे अद्वैत वेदांत के प्रखर प्रवर्तक और सनातन धर्म के पुनर्जागरण के महानायक थे। उन्होंने अपने दिव्य ज्ञान और तर्क शक्ति से भारत की आध्यात्मिक चेतना को एक नई दिशा दी और ‘एकत्व’ का संदेश दिया।
माया के आवरण को हटाकर ही आत्मबोध संभव: कौशलेश प्रताप तिवारी
मुख्य वक्ता एवं जन अभियान परिषद के संभाग समन्वयक श्री कौशलेश प्रताप तिवारी ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में अद्वैत सिद्धांत की व्याख्या की। उन्होंने कहा:
ब्रह्म सत्य, जगत मिथ्या: केवल ब्रह्म ही शाश्वत सत्य है, जबकि यह दृश्यमान संसार परिवर्तनशील और अस्थायी होने के कारण ‘माया’ है।
माया का प्रभाव: माया वह शक्ति है जो वास्तविक सत्य को छिपाकर मिथ्या जगत को सत्य के रूप में प्रस्तुत करती है, जो संसार में दुखों का कारण है।
ज्ञान मार्ग: उन्होंने जोर देकर कहा कि मोक्ष की प्राप्ति केवल कर्मकांडों से नहीं, बल्कि आत्म-ज्ञान और ब्रह्म ज्ञान से ही संभव है।
विशिष्ट जनों ने साझा किए विचार
कार्यक्रम में वरिष्ठ समाजसेवी श्री सुरेश अग्रवाल, भाजपा जिला उपाध्यक्ष श्री निखिलेश चतुर्वेदी, श्री रमेश खंडेलवाल, पंडित राजकुमार शास्त्री, मंडल अध्यक्ष मनीष चतुर्वेदी और महाविद्यालय के प्रभारी डॉ. आई.एस. कनेश ने भी शंकराचार्य के धर्म दर्शन पर विस्तार से चर्चा की। जिला समन्वयक श्री पवन सहगल ने परिषद की गतिविधियों और जनजागरूकता अभियानों की जानकारी साझा की।
प्रमुख आकर्षण:
अंकसूची वितरण: कार्यक्रम के दौरान जन अभियान परिषद के पूर्व विद्यार्थियों को उनकी अंकसूचियां प्रदान की गईं।
उपस्थिति: कार्यक्रम में विकासखंड समन्वयक श्री नरेन्द्र देशमुख, परामर्शदाता राकेश कीर (मंच संचालक), मनीष यादव (आभार प्रदर्शन) सहित नीरज चतुर्वेदी, हरीश नामदेव, सुरेश यादव, हर्ष तिवारी, मुकेश यादव, पूनम मीना और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कुणाल की कलम से
आज का विचार:
“सत्य को जानने के लिए किसी बाहरी प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि स्वयं का बोध ही सबसे बड़ा प्रकाश है। जब भ्रम की माया हटती है, तब मनुष्य को अपने भीतर के ‘अद्वैत’ का साक्षात्कार होता है।”
पत्रकार कुणाल पासवान,इटासी

