SC-ST अत्याचार निवारण अधिनियम के मामलों में बरतें तत्परता, समय पर दिलाएं राहत: कलेक्टर सोमेश मिश्रा I
नर्मदापुरम: अनुसूचित जाति एवं जनजाति (SC-ST) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत पीड़ितों को न्याय और राहत राशि उपलब्ध कराने के संबंध में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सोमेश मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित इस जिला स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक में लंबित प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक के मुख्य बिंदु और निर्देश:
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समयबद्ध कार्यवाही: कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अधिनियम के तहत दर्ज सभी प्रकरणों में शासन के नियमानुसार समय-सीमा के भीतर कार्यवाही पूरी की जाए। अन्वेषण और राहत राशि वितरण में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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जाति प्रमाण पत्र की समस्या का समाधान: बैठक में यह बात सामने आई कि कई प्रकरण जाति प्रमाण पत्र न होने के कारण लंबित रह जाते हैं। इस पर कलेक्टर ने विकासखंड स्तरीय समितियों और थानों को समन्वय कर तत्काल प्रमाण पत्र बनवाने और कार्यवाही आगे बढ़ाने को कहा।
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नियमित समीक्षा: कलेक्टर ने निर्देशित किया कि विकासखंड स्तरीय समिति की बैठकें हर तीन महीने (त्रैमास) में अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएं ताकि जमीनी स्तर पर मामलों का त्वरित निराकरण हो सके।
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न्यायालयीन प्रकरणों पर नजर: न्यायालय में लंबित और बरी (निराकृत) हुए प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अभियोजन अधिकारियों को निर्देश दिए कि मामलों को मजबूती से रखा जाए ताकि पीड़ितों को वास्तविक न्याय मिल सके।
उपस्थित अधिकारी:
बैठक में पुलिस अधीक्षक साईं कृष्ण एस. थोटा, जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन, अपर कलेक्टर बृजेंद्र रावत, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग, विशेष लोक अभियोजक सत्येन्द्र पटेल और जिला अभियोजन अधिकारी राजकुमार नेमा सहित समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
पत्रकार कुणाल पासवान इटारसी
कुणाल की कलम से
“सामाजिक न्याय केवल फाइलों में नहीं, बल्कि धरातल पर नजर आना चाहिए।
जब प्रशासन और कानून समय पर पीड़ित का हाथ थामते हैं,
तभी समाज में न्याय के प्रति विश्वास मजबूत होता है।”

