नर्मदा समय संवाददाता लाल यादव की प्रयागराज से रिपोर्ट
प्रयागराज : अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को गोलियों से भूनने वाले तीनों शूटर पुलिस की पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे कर रहे हैं। आरोपियों ने बताया कि वह 13 अप्रैल को ही प्रयागराज पहुंचे गए थे। यहां आने के बाद इन्होंने रेलवे स्टेशन के पास ही एक होटल में कमरा लिया और वहीं ठहरे। तीनों सनी सिंह, लवलेश तिवारी व अरुण मौर्य ने बताया कि वह इस वारदात को अंजाम देने के लिए दो दिनों से लगे थे। वारदात की रात से दो दिन पहले से ये तीनों अतीक और अशरफ को मारना चाहते थे। वो लगातार मीडियाकर्मी बनकर घूमते और भीड़ में शामिल थे। लेकिन हर बार मौका न मिलने के कारण प्लान को टालते रहे। लेकिन 15 अप्रैल की रात जब अतीक और अशरफ को मेडिकल के लिए कॉल्विन अस्पताल लाया गया तब वहां ज्यादा भीड़ नहीं थी और उन्हें मौका मिल गया। इसके बाद इन्होंने दोनों पर गोलियां बरसा दीं। 
13 अप्रैल को प्रयागराज आये थे स्टेशन के पास कमरा लिया :-
आरोपियों ने बताया कि वह 13 अप्रैल को ही प्रयागराज पहुंचे गए थे। यहां आने के बाद इन्होंने रेलवे स्टेशन के पास ही एक होटल में कमरा लिया और वहीं ठहरे। 14 अप्रैल को हम दोनों भाइयों को मारना चाहते थे लेकिन उस वक्त पुलिस का सुरक्षा घेरा ज्यादा था इसलिए बिना मारे लौट आए।
पहले कोर्ट के बाहर मारना चाहते थे :-
आरोपियों ने बताया कि वह इन दोनों भाइयों को कोर्ट में पेश के दौरान ले जाते वक्त इन्हें मारना चाहते थे। लेकिन वहां सुरक्षा इंतजाम अधिक होने के कारण प्लान को कैंसिल कर देते हैं। इस बीच जानकारी मिली कि अतीक और अशरफ को मेडिकल के लिए कॉल्विन अस्पताल मेडिकल के लिए पुलिस टीम लेकर जाएगी। ऐसे में हमारी कोशिश थी कि हर हाल में इन्हें वहीं निशाना बनाया जाए। इन तीनों का मानना था कि दोनों भाइयों को मारकर ये जुर्म किया दुनिया में खूब नाम कमाएंगे और देशभर में इनकी चर्चा होगी।
किसने मुहैया कराईं लाखों की पिस्टल:-
एसआईटी अफसरों ने तीनों शूटरों से यह भी पूछा कि उनके पास सात से आठ लाख मूल्य वाली जिगाना व गिरसान पिस्टलें कहां से आईं। गौरतलब है कि इन दोनों पिस्टलों के साथ एक देशी पिस्टल आरोपियों के कब्जे से बरामद हुई है। सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में भी तीनों गोलमोल जवाब ही देते रहे। दिल्ली के गोगी गैंग से उन्होंने असला मिलना बताया किया किंतु फिलहाल उन्होंने उस शख्स का नाम नहीं कबूला, जिसने उन्हें असलहे मुहैया कराए थे। इस संबंध में अपने बयान से बार-बार मुकर रहे है ।
यह भी रहे सवाल:-
- तुम लोगों के मोबाइल फोन कहां हैं? मोबाइल नहीं है तो आपस में कैसे संपर्क करते थे?
- प्रयागराज कब आए और कहां ठिकाना बनाया? इसमें किसने मदद की?
- तीनों पहली बार कब और कहां मिले?
- अतीक-अशरफ के अस्पताल लाए जाने की खबर कैसे मिली?
घटनास्थल तक कैसे, कितनी देर पहले पहुंचे? - वीडियो कैमरा व माइक आईडी कहां से लाए?
- इससे पहले कभी प्रयागराज आए थे?
- अतीक-अशरफ को मारने के लिए घटनास्थल के रूप में अस्पताल ही क्यों चुना?
- वारदात की प्लानिंग कब और कहां हुई?
- तीनों के अलावा भी कोई शामिल है साजिश में?
- कस्टडी रिमांड में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद क्यों लिया इतना बड़ा खतरा?
- पुलिस जवाबी फायरिंग करती तो मारे जाते, क्या कभी डर नहीं लगा?

