विभीषण शरणागति: मोह और अहंकार के त्याग से ही संभव है प्रभु मिलन – मानस कोकिला श्रीमती कृष्णा देवी I
नर्मदापुरम। पंडित रामलाल शर्मा स्मृति समारोह के चौथे दिन अध्यात्म की अविरल धारा बही। भागलपुर (बिहार) से पधारीं सुप्रसिद्ध मानस कोकिला श्रीमती कृष्णा देवी मिश्र ने व्यासगादी से ‘विभीषण शरणागति’ प्रसंग पर सारगर्भित व्याख्यान देते हुए कहा कि सत्संग के क्षण अत्यंत दुर्लभ होते हैं, जो केवल ईश्वरीय कृपा से ही प्राप्त होते हैं।
जीव, मोह और अहंकार का आध्यात्मिक विश्लेषण
श्रीमती कृष्णा देवी ने विनय पत्रिका के माध्यम से जीव की जीवन यात्रा का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से समझाया कि:
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रावण: मोह का प्रतीक है।
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कुंभकरण: अहंकार का प्रतीक है।
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विभीषण: उस जीव के समान हैं जिसके पास भक्ति और मंदिर तो है, लेकिन ‘भरोसे’ की कमी थी। हनुमान जी के आगमन के बाद ही उनके जीवन में वह अटूट विश्वास जागृत हुआ।
साधु अपमान का परिणाम
कथा के दौरान उन्होंने बताया कि जब रावण ने विभीषण को लात मारकर अपमानित किया, तब रावण का पतन निश्चित हो गया। स्वयं भगवान शंकर कहते हैं कि साधु का अपमान करने से व्यक्ति के संपूर्ण कल्याण की हानि होती है। विभीषण जी ने अपमानित होने के बाद भी रावण के हित की कामना की, जो उनकी उच्च कोटि की साधुता को दर्शाता है।
प्रभु चरणों की महिमा
विभीषण की राम जी से मिलने की व्याकुलता का वर्णन करते हुए मानस कोकिला ने कहा कि वे मन में उन कोमल और लाल वर्ण के चरणों के दर्शन की कल्पना कर रहे थे, जिन्होंने अहिल्या का उद्धार किया, दंडक वन को पवित्र किया और जो साक्षात महादेव के हृदय में विराजते हैं।
गरिमामयी उपस्थिति एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं पुष्पहार से हुआ, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:
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डॉ. सीता शरण शर्मा (विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष)
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राजेन्द्र सिंह राजपूत (पूर्व विधायक)
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व्यंकटेश शर्मा (SPM School मुख्य महाप्रबंधक, )
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अरुण शर्मा, मनोज चौरे एवं मुकेश श्रीवास्तव
भजन अंजलि: समारोह में कुमारी सुरभि वशिष्ठ ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी। उनके साथ हारमोनियम पर राम परसाईं, तबले पर सक्षम पाठक और गिटार पर यश मालवीय ने संगत की। कार्यक्रम का भावपूर्ण समापन श्रीमती कृष्णा देवी के सुप्रसिद्ध शयन पद “नैनों में नींद भर आई” के साथ हुआ।

पत्रकार-कुणाल पासवान
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