अनोखी पहल: नर्मदापुरम में विवाह की वेदी पर गूँजा लोकतंत्र का मान, पिता ने बेटी-दामाद को भेंट किया ‘संविधान’
नर्मदापुरम/इटारसी: आज के दौर में जहाँ विवाह समारोहों में कीमती उपहारों और आभूषणों का प्रदर्शन आम बात है, वहीं नर्मदापुरम के आदर्श नगर (ITI) क्षेत्र में एक पिता ने समाज के समक्ष एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है।
दहेज नहीं, ‘ज्ञान’ दिया उपहार में
आदर्श नगर निवासी श्री घनश्याम गोलिया ने अपनी सुपुत्री के विवाह के शुभ अवसर पर एक नई और प्रगतिशील परंपरा की नींव रखी। उन्होंने नवविवाहित जोड़े को उपहार स्वरूप ‘भारत का संविधान’ भेंट किया।
इस भावुक और प्रेरणादायक क्षण के दौरान श्री गोलिया ने कहा कि गृहस्थ जीवन की शुरुआत करने वाले युवाओं के लिए अपने अधिकारों और कर्तव्यों को जानना अत्यंत आवश्यक है। यह उपहार केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि सुरक्षित और न्यायपूर्ण जीवन जीने का एक मार्गदर्शक है।
समाज में सराहना
विवाह के मंडप में जब पिता ने बेटी और दामाद को संविधान की प्रति सौंपी, तो वहां उपस्थित सभी गणमान्य नागरिकों और परिजनों ने इस पहल की सराहना की। उपस्थित लोगों का कहना था कि ऐसे नवाचार समाज को दहेज जैसी कुरीतियों से दूर ले जाकर बौद्धिक सशक्तिकरण की ओर अग्रसर करते हैं।
कुणाल की कलम से
“उपहार केवल वस्तुओं का संग्रह नहीं, बल्कि संस्कारों का प्रतिबिंब होते हैं।
जब एक पिता अपनी बेटी को विदा करते समय उसके हाथ में देश का सर्वोच्च ग्रंथ ‘संविधान’ थमाता है, तो वह उसे स्वाभिमान और समानता के साथ जीने का साहस प्रदान करता है। यह पहल आधुनिक भारत की उस तस्वीर को दर्शाती है जहाँ परंपराएं अब जागरूकता का माध्यम बन रही हैं।”
रिपोर्ट: पत्रकार कुणाल पासवान

