श्रमिकों के सम्मान में उमड़ा सेवा का सैलाब: समाजसेवी सुरेश करिया ने 35 वर्षों की परंपरा को रखा बरकरार I
इटारसी। “मजदूरों का पसीना सूखने से पहले उनका हक और सम्मान उन्हें मिलना चाहिए” – इसी ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए आज अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर इटारसी के हृदय स्थल जयस्तंभ चौक पर सेवा का एक अनुपम उदाहरण देखने को मिला। नगर के सुप्रसिद्ध समाजसेवी सुरेश करिया द्वारा विगत साढ़े तीन दशकों की गौरवशाली परंपरा को निभाते हुए इस वर्ष भी श्रमिकों का भव्य सम्मान किया गया।
1991 से अनवरत सेवा का संकल्प
गौरतलब है कि सुरेश करिया द्वारा सेवा का यह सफर सन 1991 में शुरू किया गया था, जो आज 2026 में भी उसी उत्साह और श्रद्धा के साथ जारी है। जयस्तंभ चौक पर एकत्रित सैकड़ों की संख्या में मजदूर भाइयों और मेहनतकशों को श्री करिया ने स्वयं अपने हाथों से बड़े ही स्नेह और आदर के साथ सुरुचिपूर्ण भोजन कराया। भीषण गर्मी के बीच इस आत्मीय आयोजन ने मजदूरों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी।
राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों का योगदान सर्वोपरि: सुरेश करिया
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए सुरेश कारिया ने भावुक स्वर में कहा, “आज हम जिन आलीशान इमारतों और सुविधाओं का उपभोग करते हैं, उनकी नींव में हमारे श्रमिक भाइयों का खून-पसीना लगा होता है। राष्ट्र निर्माण की मशीनरी का सबसे महत्वपूर्ण पुर्जा हमारा मजदूर है। इनकी सेवा करना किसी उपकार से कम नहीं, बल्कि हमारा नैतिक कर्तव्य है।”
नगरवासियों ने की मुक्तकंठ से सराहना
वर्षों से चली आ रही इस निस्वार्थ सेवा को देखकर वहाँ मौजूद राहगीरों और स्थानीय नागरिकों ने भी सुरेश कारिया के प्रयासों की जमकर सराहना की। कार्यक्रम के दौरान न केवल भोजन वितरण किया गया, बल्कि मजदूरों की समस्याओं पर चर्चा कर उन्हें प्रोत्साहित भी किया गया।
आज का विचार: “हाथों की लकीरें मेहनत से बनती हैं, और समाज की तकदीर मजदूरों के पसीने से।
जो राष्ट्र अपने श्रमिकों का सम्मान करना जानता है, उन्नति उसके कदम चूमती है।”
– पत्रकार कुणाल पासवान

