हृदयविदारक: नियति और नियत के बीच उलझी जिंदगी, मासूम की आखिरी नींद ने सबको किया निशब्द I
इटारसी। समाज में कभी-कभी ऐसी घटनाएं घट जाती हैं, जिन्हें देख पत्थर दिल भी पिघल जाए। आज एक ऐसा ही विचलित करने वाला दृश्य सामने आया, जिसने न केवल आंखों को नम कर दिया, बल्कि मन में कई अनुत्तरित प्रश्न भी छोड़ दिए। एक हंसता-खेलता परिवार, कुछ खिलखिलाते चेहरे, और अचानक सब कुछ काल के गाल में समा गया।
मां की गोद और वो आखिरी नींद
सबसे अधिक हृदयविदारक वह पल था, जब एक मासूम अपनी मां की गोद में हमेशा के लिए सो गया। जिसने भी यह मंजर देखा, उसकी रूह कांप गई। वह गोद जो ममता और सुरक्षा का सबसे बड़ा कवच मानी जाती है, वहीं नियति ने अपना क्रूर खेल खेल दिया। जो लोग कल तक हमारे बीच थे, आज वे ऐसी राह पर चले गए जहाँ से कभी कोई वापस नहीं आता।
नियति या नियत: दोष किसका?
अक्सर ऐसी घटनाओं के बाद समाज मौन होकर बस एक ही सवाल पूछता है—दोष किसे दें? क्या यह हमारी ‘नियत’ की खोट है, जो सुरक्षा और व्यवस्थाओं में चूक कर जाती है? या फिर यह उस ‘नियति’ का लिखा है, जिसे टालना इंसान के बस में नहीं? जब मासूमों की जान जाती है, तो न्याय और तर्क के सारे शब्द छोटे पड़ जाते हैं। आज पूरा वातावरण शोकाकुल है और हर दिल से बस एक ही दुआ निकल रही है—शांति।
आज का विचार: “मृत्यु सत्य है, लेकिन असमय और दुखद अंत झकझोर देता है।
हम अक्सर व्यवस्थाओं को कोसते हैं या भाग्य को, पर सच तो यह है कि इंसान,
की बेबसी के आगे कभी-कभी कुदरत भी मौन हो जाती है।
ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करे।”
– पत्रकार कुणाल पासवान

